नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026। डॉक्टरों के विज्ञापन के नए नियम – अब स्वास्थ्य क्षेत्र की डिजिटल मार्केटिंग के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की नई गाइडलाइन के तहत डॉक्टरों और अस्पतालों को ऑनलाइन प्रचार करते समय सही जानकारी, पारदर्शिता और मेडिकल नैतिकता का ध्यान रखना जरूरी है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन नियमों का आम लोगों, डॉक्टरों और अस्पतालों पर क्या असर पड़ सकता है।
अब डॉक्टरों और अस्पतालों के ऑनलाइन प्रचार में किए जाने वाले दावों पर ज्यादा ध्यान देना होगा। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 6 अक्टूबर 2026 को डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के विज्ञापन तथा सार्वजनिक संचार को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य मरीजों को भ्रामक दावों, बढ़ा-चढ़ाकर किए गए प्रचार और इलाज के नाम पर गुमराह करने वाली मार्केटिंग से बचाना है। ये दिशानिर्देश जारी होने के साथ ही प्रभावी हो गए हैं।
इसका सीधा मतलब है कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार में केवल मरीजों को आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि सही और भरोसेमंद जानकारी देना भी जरूरी है। वेबसाइट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन और डिजिटल प्रचार में इस्तेमाल होने वाले कंटेंट पर भी इन नियमों का असर पड़ता है।
क्या अब डॉक्टर और अस्पताल सोशल मीडिया पर प्रचार नहीं कर सकेंगे?
नहीं, ऐसा नहीं है। डॉक्टर और अस्पताल अपनी सेवाओं, विशेषज्ञताओं, सुविधाओं और स्वास्थ्य संबंधी उपयोगी जानकारी को लोगों तक पहुँचा सकते हैं। लेकिन प्रचार के नाम पर ऐसे दावे नहीं किए जाने चाहिए जो मरीजों को गलत उम्मीद दें या उन्हें इलाज के बारे में गलत निर्णय लेने के लिए प्रेरित करें।
उदाहरण के लिए, किसी अस्पताल की वेबसाइट पर उसके विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, डॉक्टरों की योग्यताओं और संपर्क की जानकारी देना उपयोगी है। इसके विपरीत, बिना प्रमाण किसी इलाज को सबसे अच्छा बताना या हर मरीज के ठीक होने की गारंटी देना भ्रामक हो सकता है।

डॉक्टरों के विज्ञापन के नए नियम:
1. “100 प्रतिशत इलाज की गारंटी” जैसे दावों पर रोक
कई बार विज्ञापनों में “100% सफल इलाज”, “बीमारी जड़ से खत्म”, “गारंटीड क्योर” या “भारत का नंबर-1 डॉक्टर” जैसे वाक्य इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे दावे मरीजों के मन में अवास्तविक उम्मीद पैदा कर सकते हैं।
नई गाइडलाइन के तहत भ्रामक, बढ़ा-चढ़ाकर किए गए और अप्रमाणित मेडिकल दावों पर रोक लगाई गई है। मरीजों को यह समझना चाहिए कि इलाज का परिणाम बीमारी, उसकी गंभीरता, मरीज की स्थिति और दूसरे चिकित्सकीय कारणों पर निर्भर कर सकता है।
2. मरीजों की फोटो, वीडियो और सफलता की कहानियों का इस्तेमाल
अक्सर अस्पताल सोशल मीडिया पर किसी मरीज की इलाज से पहले और बाद की तस्वीरें, ऑपरेशन के परिणाम या ठीक होने की कहानी साझा करते हैं। ऐसी सामग्री लोगों को इलाज के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जाती है।
NMC की गाइडलाइन मरीजों के Testimonials, Endorsements और इलाज के परिणामों को प्रचार के रूप में इस्तेमाल करने पर सख्ती करती है। केवल मरीज की सहमति मिल जाने से हर प्रकार का प्रचार अपने आप अनुमत नहीं हो जाता। वैज्ञानिक या शैक्षणिक उपयोग के लिए लागू शर्तों का पालन करना जरूरी है।
आम लोगों के लिए इसका मतलब है कि किसी एक मरीज की सफलता की कहानी देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति का इलाज भी उसी तरह सफल होगा।
3. फर्जी रिव्यू और खरीदी हुई रेटिंग पर सख्ती
आज बहुत से लोग डॉक्टर चुनने से पहले Google पर रेटिंग, वेबसाइट पर मरीजों के अनुभव और सोशल मीडिया कमेंट देखते हैं। इसलिए ऑनलाइन रिव्यू का मरीजों के फैसले पर बड़ा असर पड़ता है।
गाइडलाइन के अनुसार, डॉक्टरों और अस्पतालों को फर्जी, खरीदे हुए, भ्रामक या हेरफेर करके तैयार किए गए रिव्यू और रेटिंग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऑनलाइन लोकप्रियता बढ़ाने के लिए नकली फॉलोअर्स या भ्रामक रैंकिंग का सहारा लेना भी चिंता का विषय है।
मरीजों को भी केवल पांच सितारा रेटिंग के आधार पर डॉक्टर चुनने के बजाय उनकी योग्यता, अनुभव, विशेषज्ञता और अपनी जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।
4. क्या AI से बनाई गई मेडिकल पोस्ट और वीडियो पर भी नियम लागू होंगे?
हाँ। अब डिजिटल प्रचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार की गई सामग्री भी इन दिशानिर्देशों के दायरे में आ सकती है।
उदाहरण के लिए, AI की मदद से किसी नकली मरीज की सफलता की कहानी बनाना, किसी डॉक्टर के नाम से मनगढ़ंत बयान तैयार करना या इलाज के परिणाम को वास्तविकता से बेहतर दिखाना गंभीर समस्या है। AI का इस्तेमाल करने से भ्रामक प्रचार सही नहीं हो जाता।
हालाँकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि स्वास्थ्य जागरूकता के लिए AI का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसी सामग्री को तथ्यात्मक, जिम्मेदार और लागू नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
5. क्या अस्पतालों की वेबसाइट और डिजिटल मार्केटिंग बंद हो जाएगी?
नहीं। गाइडलाइन का उद्देश्य अस्पतालों की वेबसाइट या डिजिटल उपस्थिति को बंद करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार को अधिक जिम्मेदार बनाना है।
अस्पताल अपनी वास्तविक सुविधाओं, विभागों, उपलब्ध सेवाओं और डॉक्टरों की सही जानकारी दे सकते हैं। स्वास्थ्य जागरूकता, बीमारी से बचाव, सामान्य सावधानियों और वैज्ञानिक जानकारी से जुड़े कंटेंट की भी उपयोगिता बनी रहेगी, बशर्ते उसका इस्तेमाल भ्रामक प्रचार या अनुचित तरीके से मरीज जुटाने के लिए न किया जाए।
इसलिए वेबसाइट बनाना, SEO करना या सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करना अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है। जरूरी यह है कि कंटेंट और प्रचार का तरीका गाइडलाइन के अनुरूप हो।
6. डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों के लिए क्या संदेश है?
अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए वेबसाइट, SEO, Google Business Profile, सोशल मीडिया और ऑनलाइन विज्ञापन संभालने वाली एजेंसियों को भी अब मेडिकल कंटेंट तैयार करते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।
किसी डॉक्टर या अस्पताल के लिए प्रचार तैयार करते समय एजेंसी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि:
- डॉक्टर की योग्यता और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी सही हो।
- इलाज के परिणामों की गारंटी या अप्रमाणित दावे न किए जाएँ।
- फर्जी रिव्यू, खरीदी हुई रेटिंग या नकली मरीजों की कहानियाँ इस्तेमाल न हों।
- मरीजों की पहचान, फोटो और निजी स्वास्थ्य जानकारी से जुड़े नियमों का पालन हो।
- मेडिकल दावों की पुष्टि संबंधित डॉक्टर या अधिकृत मेडिकल टीम से कराई जाए।
किसी एजेंसी को प्रचार का काम सौंप देने से डॉक्टर या अस्पताल की जिम्मेदारी अपने आप समाप्त नहीं हो जाती। इसलिए क्लाइंट और मार्केटिंग टीम, दोनों के लिए स्पष्ट कंटेंट-अप्रूवल प्रक्रिया जरूरी है।
7. नियमों का उल्लंघन होने पर क्या हो सकता है?
इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता और मरीजों के भरोसे को बनाए रखना है। उल्लंघन की प्रकृति और लागू कानूनों के आधार पर संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई या सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। डॉक्टरों पर लागू पेशेवर अनुशासन संबंधी नियमों और अस्पतालों के लिए लागू व्यवस्थाओं में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी खास मामले में कार्रवाई का परिणाम संबंधित प्रावधानों और तथ्यों पर निर्भर करेगा।
आम लोगों को इससे क्या फायदा होगा?
इन नियमों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी फैसले लेते समय अधिक भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करना है। जब इलाज के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर दावे, नकली रिव्यू और मनगढ़ंत सफलता की कहानियाँ कम होंगी, तो मरीजों के लिए सही जानकारी और प्रचार के बीच अंतर समझना आसान हो सकता है।
फिर भी, किसी डॉक्टर या अस्पताल की विश्वसनीयता जाँचते समय केवल विज्ञापन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। डॉक्टर की योग्यता, संबंधित विशेषज्ञता, रजिस्ट्रेशन और जरूरत पड़ने पर दूसरी चिकित्सकीय राय पर भी ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष
NMC की नई गाइडलाइन डॉक्टरों और अस्पतालों को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार में अधिक जिम्मेदार और पारदर्शी रहने का संदेश देती है। डिजिटल दौर में मरीज इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं। इसलिए मेडिकल विज्ञापन का उद्देश्य केवल लोगों का ध्यान आकर्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें सही, स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी देना होना चाहिए।
आधिकारिक स्रोत: National Medical Commission (NMC) — Guidelines on Ethical Advertising and Public Communication by Hospitals/Medical Institutions and Registered Medical Practitioners, 6 अक्टूबर 2026।
यहाँ NMC का आधिकारिक सर्कुलर पढ़ें
डिस्क्लेमर: यह लेख NMC की गाइडलाइन को आम लोगों की समझ के लिए सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। यह कानूनी सलाह नहीं है। किसी विशिष्ट विज्ञापन या मामले पर निर्णय लेने से पहले आधिकारिक दस्तावेज़ और लागू नियमों की जाँच करें।
