15 अगस्त एक ऐसा दिन जिस दिन हम अपने व्यस्त समय से समय निकाल चर्चा करते है अपने देश के बारे मे, उसके विकास के बारे मे, पुराने नेताओ की तारीफ तो नये को गाली, कुछ बुढ्ढजीवी लोग देश की तरक्की की भी बात करते है और ये सब पूरा दिन चलता है| और ऐसा बनारस के छोटे-मोटे कस्बे से लेकर दिल्ली तक चलता है|
मुझे 1947 से पहले का तो पता नही क्युकि पुनर्जन्म की बाते मुझे याद नही रहती पर जो सुना, पढ़ा उसके अनुसार मौजूदा हालत की तुलना करता हूँ तो यक़ीनन सिर गर्व से उँचा हो जाता है| अब हम एक लहुलुहान देश नही है, बल्कि हमारी ताक़त का लोहा दुनिया मानती है, कुछ मूलभूत समस्याए जैसे बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, ग़रीबी आज भी हमारे यहाँ कायम है पर ऐसा संसार के किस देश मे नही है? क्या सबसे ताकतवर अमेरिका मे (जिसने अपनी आज़ादी की 234वी वर्षगाँठ मनाई है) ग़रीबी नही है? क्या वहाँ बेरोज़गार नही बढ़ रहे? क्या ओबामा से पहले कोई अश्वेत या कोई महिला राष्ट्रपति बन पाई? दुनिया का स्वर्ग माना जाने वाला अमेरिका क्या अंदरूनी तौर से डर का शिकार नही? अगर ये सब सच है तो हमे गर्व करना चाहिए की हमने 64 साल मे बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की| हमे ये नही भूलना चाहिए की सफलता बरकरार रखने के लिए नयी नयी चुनौतियो का सामना करना पड़ता है| इस समय पूरी दुनिया मे जबरजस्त परिवर्तन का दौर है ऐसे मे हमे अपनी समस्यायों से जूझने की सामूहिक रणनीति बनाने की ज़रूरत है| मोबाइल पर मैसेज और माइक पर लोकप्रिय भासण की नही|
