मै नही हू तो कुछ नही

मै घर की रंगीन चारदीवारी मॆंक़ैद सी एक औरत, या सजा हुआ कोई फानूसमै अपने घर की रौनक हूया शायद घर वालो का गुरूर मै...

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मै घर की रंगीन चारदीवारी मॆं
क़ैद सी एक औरत, या सजा हुआ कोई फानूस
मै अपने घर की रौनक हू
या शायद घर वालो का गुरूर

मै घर को बनने वाली एक कड़ी या
दिवारू पर लगी हुई एक पैंटिंग
अनेको चटकीले रंगो से सजी
ओर हरियाली से खूबसूरत रंगो मै सनी ,

मै क्या हू? मुझसे ना पूछ ए मेरे खुदा,
आज तक खुद को समझ ना पायी,
मै नही हू तो कुछ नही ह,
मै हू तो घर मै रोनक ह!

पर मेरे चेहरे पर क्यों रौनक नही ह
मै क्यों एक मूरत सी कोने मै पडी हुई
मै क्यों एक बुत सी कमरे मै सजी हुई
मै क्यों चुप सी खामोश पड़ी हुई!

जब तुम जान जाओ मै क्या हू,
मुझे भी बता देना, जब मेरे हँसने पर,
तुम कोई पाबन्दी ना लगाओ तो हँसा देना,
ओर जब लगे इस मूरत की जरूरत नही तो बाहर फीकवा देना

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

Pravin Dubey

डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ और ब्लॉगर। टेकनोलॉजी, डिजिटल दुनिया, व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर लिखना पसंद करते हैं।

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