मैं सोचता रहता हूं…

काश, आज हमारा ऑफिस गांव में होता…नाश्ता करके घर से निकलते और खरामा- खरामा टहलते हुए ऑफिस पहुंच जाते जो कि घर से दस कदम...

| | 1 मिनट पढ़ें | 6 व्यूज़

काश, आज हमारा ऑफिस गांव में होता…नाश्ता करके घर से निकलते और खरामा- खरामा टहलते हुए ऑफिस पहुंच जाते जो कि घर से दस कदम की दूरी पर होता। रास्ते में साइकिल से शहर जाते स्कूल के गुरु जी से दुआ- सलाम भी कर लेते। ऑफिस जाकर कुर्सी- टेबल बाहर निकालते और नीम पेड़ के नीचे, गुनगुनी धूप में काम करने बैठ जाते। पास की गुमटी से चूल्हे में लकड़ी जला कर बनाई अदरकवाली चाय भी आ जाती। चाय आती तो साथी भी आ जाते, अखबार भी ले आते। फिर अखबार में छपी दुनिया भर की खबरों पर चर्चा की जाती, सुबह सुने समाचार को “ब्रेकिंग न्यूज” की तरह पेश किया जाता और दिल्ली के लोगों की हंसी उड़ाई जाती कि बेचारे बिना पेट्रोल के ऑफिस नहीं जा पा रहे हैं।  काश…..

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

Pravin Dubey

डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ और ब्लॉगर। टेकनोलॉजी, डिजिटल दुनिया, व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर लिखना पसंद करते हैं।

Leave a Comment